16.8.4Atharvaved
मंत्र:१६.८.४ (16.8.4)सूक्त (८)

Shlok 1 of 1

मंत्र:१६.८.४ (16.8.4)सूक्त (८)

तस्ये॒दंवर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्नि वे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (४)

उस के तेज, बल, प्राण और आयु को मैं घेरता हूं. मैं इसे नीचे गिराता हूं. (४)

I surround his glory, strength, life and age. I knock it down. (4)