18.1.9Atharvaved
मंत्र:१८.१.९ (18.1.9)सूक्त (१)

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मंत्र:१८.१.९ (18.1.9)सूक्त (१)

न ति॑ष्ठन्ति॒ ननि मि॑षन्त्ये॒ते दे॒वानां॒ स्पश॑ इ॒ह ये च॑रन्ति । अ॒न्येन॒ मदा॑हनो याहि॒तूयं॒ तेन॒ वि वृ॑ह॒ रथ्ये॑व च॒क्रा ॥ (९)

यम-हे यमी! देवदूत लगातार विचरण करते रहते हैं. इसलिए हे मेरी धर्म बुद्धि को नष्ट करने की इच्छा करने वाली! तू मुझे छोड़ कर किसी अन्य को अपना पति बना तथा शीघ्र जा कर रथ के पहिए के समान संयुक्त हो जा. (९)

Yama- O Yummy! Angels are constantly moving. Therefore, O one who wishes to destroy my righteous intellect! You should make someone else your husband except me and go quickly and be united like the wheel of the chariot. (9)