18.2.5Atharvaved
मंत्र:१८.२.५ (18.2.5)सूक्त (२)
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य॒दा शृ॒तंकृ॒णवो॑ जातवे॒दोऽथे॒ममे॑नं॒ परि॑ दत्तात्पि॒तृभ्यः॑ । य॒दोगच्छा॒त्यसु॑नीतिमे॒तामथ॑ दे॒वानां॑ वश॒नीर्भ॑वाति ॥ (५)
हे जातवेद अग्नि! जब तू इस प्रेत को पूरी तरह भस्म कर दे, तब इसे पितरों के लिए सौंप दे. जब इस के प्राण निकल जाते हैं, तब यह प्रेत देवों के वश में हो जाता है. (५)
O agni! When you have completely consumed this ghost, then hand it over to the fathers. When his life is gone, then this ghost becomes under the control of gods. (5)