18.2.9Atharvaved
मंत्र:१८.२.९ (18.2.9)सूक्त (२)
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यास्ते॑ शो॒चयो॒रंह॑यो जातवेदो॒ याभि॑रापृ॒णासि॒ दिव॑म॒न्तरि॑क्षम् । अ॒जं यन्त॒मनु॒ ताःसमृ॑ण्वता॒मथेत॑राभिः शि॒वत॑माभिः शृ॒तं कृ॑धि ॥ (९)
हे जातवेद अग्नि! तेरा जो ज्वालारूपी शरीर है, उस से तू झुलोक तथा अंतरिक्ष लोक व्याप्त करता है. तेरा ज्वालारूपी शरीर द्युलोक को जाती हुई इस प्रेत की आत्मा के पीछे जाए तथा दूसरे कल्याणकारी शरीरों के पीछे रह गई इस प्रेत की मृत देह को पूरी तरह जला दे. (९)
O jataved agni! With your flame-like body, you surround the world of slums and space. Your flame-like body goes after the soul of this ghost going to Dulok and completely burn the dead body of this ghost left behind other welfare bodies. (9)