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यामाहु॑तिं प्रथ॒मामथ॑र्वा॒ या जा॒ता या ह॒व्यमकृ॑णोज्जा॒तवे॑दाः । तां त॑ ए॒तां प्र॑थ॒मो जो॑हवीमि॒ ताभि॑ष्टु॒प्तो व॑हतु ह॒व्यम॒ग्निर॒ग्नये॒ स्वाहा॑ ॥ (१)
हे अग्नि! अथर्वा रूप परमात्मा ने सृष्टि से पूर्व अपने द्वारा रचे हुए देवताओं को प्रसन्न करने के लिए तुम में जो आहुति दी थी और तुम ने उस आहुति को देवगण तक पहुंचने योग्य बनाया, हे अग्नि! मैं सब यजमानों से पहले उस आहुति को तुम्हारे मुख में डालता हूं. हवि प्राप्त कराने वाले दूत रूप, देवता रूप एवं हवि प्रक्षेप के आधार रूप तीन रूपों से स्तुति किए गए अग्नि मेरा यह हवि देवों को प्राप्त कराएं. (१)
O agni! The sacrifice made by the Atharva form God in you to please the gods created by Him before creation and you made that sacrifice worthy of reaching the gods, O Agni! I put that sacrifice in your mouth before all the hosts. Get this Havi Devas of Agni, who are praised in three forms as the messenger form, the deity form and the basis of the Havi projection. (1)