2.3.1Atharvaved
मंत्र:२.३.१ (2.3.1)सूक्त (३)

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मंत्र:२.३.१ (2.3.1)सूक्त (३)

अ॒दो यद॑व॒धाव॑त्यव॒त्कमधि॒ पर्व॑तात् । तत्ते॑ कृणोमि भेष॒जं सुभे॑षजं॒ यथास॑सि ॥ (१)

मुंजवान पर्वत से उतर कर जो मूंज धरती पर वर्तमान है, हे मूंज! तेरे उस अग्रभाग से मैं ओषधि बनाता हूं, क्योंकि तू उत्तम जड़ीबूटी है. (१)

Coming down from Mount Munjwan, the moonj that is present on the earth, O Moonj! From that forearm of yours I make medicine, for you are the best herb. (1)