2.4.3Atharvaved
मंत्र:२.४.३ (2.4.3)सूक्त (४)

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मंत्र:२.४.३ (2.4.3)सूक्त (४)

अ॒यं विष्क॑न्धं सहते॒ ऽयं बा॑ध॒ते अ॒त्त्रिणः॑ । अ॒यं नो॑ वि॒श्वभे॑षजो जङ्गि॒डः पा॒त्वंह॑सः ॥ (३)

ज॑गिड़ वृक्ष से निर्मित यह मणि दूसरों को पराजित करती है, कृत्या आदि भक्षकों को नष्ट करती है तथा समस्त रोगों की ओषधि है. यह जंगिड़ मणि हमें पाप से बचाए. (३)

This gem made from the Jaegir tree defeats others, destroys the eaters like kriya etc. and is the medicine of all diseases. This jangid mani saved us from sin. (3)