2.7.5Atharvaved
मंत्र:२.७.५ (2.7.5)सूक्त (७)

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मंत्र:२.७.५ (2.7.5)सूक्त (७)

श॒प्तार॑मेतु श॒पथो॒ यः सु॒हार्त्तेन॑ नः स॒ह । चक्षु॑र्मन्त्रस्य दु॒र्हार्दः॑ पृ॒ष्टीरपि॑ शृणीमसि ॥ (५)

मुझे दिया हुआ शाप उसी के पास लौट जाए, जिस ने मुझे शाप दिया है. जो पुरुष शोभन हृदय वाला है, उस मित्र के साथ हम सुखी रहें. हम चुगली करने वाले दुष्ट हृदय वाले की आंखों एवं पसली की हड्डी को नष्ट करते हैं. (५)

Let the curse given to me return to the one who cursed me. May we be happy with a friend who is blessed with a man with a beautiful heart. We destroy the eyes and rib bone of the evil-hearted person who chews. (5)