20.4.1Atharvaved
मंत्र:२०.४.१ (20.4.1)सूक्त (४)

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मंत्र:२०.४.१ (20.4.1)सूक्त (४)

आ नो॑ याहि सु॒ताव॑तो॒ऽस्माकं॑ सुष्टु॒तीरुप॑ । पिबा॒ सु शि॑प्रि॒न्रन्ध॑सः ॥ (१)

हे इंद्र! सोम को निचोड़ने वाले हम यजमानों के समीप आओ. हम शोभन स्तुतियों वाले हैं. हे सुंदर ठोड़ी वाले इंद्र! सोमरस का पान करो. (१)

O Indra! Come closer to the hosts who squeeze Som. We are well-praised. O beautiful chin indra! Drink somers. (1)