20.49.3Atharvaved
Sanskrit
श॒क्रो वाच॒मधृ॑ष्णुहि॒ धाम॑धर्म॒न्वि रा॑जति । विम॑दन्ब॒र्हिरास॑रन् ॥ (३)
Hindi
हे इंद्र! तुम कठोर वचन मत बोलो. तुम हमारे यज्ञ में आ कर बिछी हुई कुशाओं पर विराजमान होओ तथा प्रसन्न बनो. (३)
English
O Indra! Don't speak harsh words. You come to our yajna and sit on the lying kushas and be happy. (3)
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