20.5.1Atharvaved
मंत्र:२०.५.१ (20.5.1)सूक्त (५)

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मंत्र:२०.५.१ (20.5.1)सूक्त (५)

अ॒यमु॑ त्वा विचर्षणे॒ जनी॑रिवा॒भि संवृ॑तः । प्र सोम॑ इन्द्र सर्पतु ॥ (१)

हे विशेष द्रष्टा इंद्र! संतान वाली स्त्रियां जिस प्रकार पुत्र आदि से सभी ओर से घिरी रहती हैं, उसी प्रकार यह सोम अध्वर्यु आदि से घिरा हुआ रखा है. यह सोम तुम्हें प्राप्त हो. (१)

O special seer Indra! Just as women with children are surrounded from all sides by son etc., in the same way, it is surrounded by Soma Adhwaryu etc. This mon you get. (1)