20.69.7Atharvaved
Sanskrit
अक्षि॑तोतिः सनेदि॒मं वाज॒मिन्द्रः॑ सह॒स्रिण॑म् । यस्मि॒न्विश्वा॑नि॒ पौंस्या॑ ॥ (७)
Hindi
यज्ञ कर्म की रक्षा करने वाले इंद्र में सैकड़ों पराक्रम व्याप्त हैं. हमें उन्हीं की सेवा करनी चाहिए. (७)
English
There are hundreds of might in Indra, who protects yajna karma. We should serve them. (7)
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