20.88.3Atharvaved
Sanskrit
बृह॑स्पते॒ या प॑र॒मा प॑रा॒वदत॒ आ ते॑ ऋत॒स्पृशो॒ नि षे॑दुः । तुभ्यं॑ खा॒ता अ॑व॒ता अद्रि॑दुग्धा॒ मध्व॑ श्चोतन्त्य॒भितो॑ विर॒प्शम् ॥ (३)
Hindi
हे बृहस्पति! मृत का स्पर्श करने वाले ऋत्विज् तुम्हारी रक्षा साधनों वाली महान रक्षा के निमित्त बैठे हुए, पर्वतों से एकत्र किए हुए उत्तम मधु की तुम पर वर्षा करते हैं. (३)
English
O Jupiter! The Ritvijas, who touch the dead, shower on you the best honey collected from the mountains, sitting for the great protection of you with the means of protecting you. (3)
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