Sanskrit

य उ॑श॒ता मन॑सा॒ सोम॑मस्मै सर्वहृ॒दा दे॒वका॑मः सु॒नोति॑ । न गा इन्द्र॒स्तस्य॒ परा॑ ददाति प्रश॒स्तमिच्चारु॑मस्मै कृणोति ॥ (३)

Hindi

देवों की कामना करने वाला जो पुरुष सोमरस को तैयार करता है, उस के स्रोतों को इंद्र स्वीकार कर लेते हैं तथा मधुर वचनों के द्वारा उसे संतुष्ट करते हैं. (३)

English

Indra accepts the sources of the man who prepares Someras, who wishes for the gods, and satisfies him with sweet words. (3)