3.2.6Atharvaved
मंत्र:३.२.६ (3.2.6)सूक्त (२)
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अ॒सौ या सेना॑ मरुतः॒ परे॑षाम॒स्मानैत्य॒भ्योज॑सा॒ स्पर्ध॑माना । तां वि॑ध्यत॒ तम॒साप॑व्रतेन॒ यथै॑षाम॒न्यो अ॒न्यं न जा॒नात् ॥ (६)
हे मरुतो! शत्रुओं की यह सेना अपने बल की अधिकता के कारण हमारे साथ संघर्ष करती हुई हमारी ओर आ रही है. इसे अपने द्वारा प्रेरित माया से कर्तव्यज्ञान शून्य बना करके नष्ट कर दो. इन शत्रुओं को ऐसा बना दो कि इन में से कोई भी एक दूसरे को न पहचान सके. (६)
O Maruto! This army of enemies is coming towards us, struggling with us due to the excess of its force. Destroy it by making it void of duty by Maya inspired by you. Make these enemies such that none of them can recognize each other. (6)