3.5.1Atharvaved
मंत्र:३.५.१ (3.5.1)सूक्त (५)

Shlok 1 of 1

मंत्र:३.५.१ (3.5.1)सूक्त (५)

आयम॑गन्पर्णम॒णिर्ब॒ली बले॑न प्रमृ॒णन्त्स॒पत्ना॑न् । ओजो॑ दे॒वानां॒ पय॒ ओष॑धीनां॒ वर्च॑सा मा जिन्व॒त्वप्र॑यावन् ॥ (१)

अपनी शक्ति की अधिकता से शत्रुओं को नष्ट करने वाली तथा सभी ओषधियों की सार रूप तथा श्रेष्ठ फल देने वाली यह पर्णमणि मुझे प्राप्त हो. हे देवो! ओज रूप यह पर्णमणि मुझे अपने तेज से तेजस्वी बनाए. (१)

May I get this parnamani, which destroys enemies with the excess of my power and gives the essence and best results of all medicines. O God! This oz form makes me stunning with its sharpness. (1)