3.6.5Atharvaved
मंत्र:३.६.५ (3.6.5)सूक्त (६)

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मंत्र:३.६.५ (3.6.5)सूक्त (६)

सि॒नात्वे॑ना॒न्निरृ॑तिर्मृ॒त्योः पाशै॑रमो॒क्यैः । अश्व॑त्थ॒ शत्रू॑न्माम॒कान्यान॒हं द्वेष्मि॒ ये च॒ माम् ॥ (५)

हे अश्वत्थ! पाप की देवी मृत्यु के न छूटने वाले फंदों से मेरे उन शत्रुओं को बांधो, जिन से मैं द्वेष करता हूं और जो मुझ से द्वेष करते हैं. (५)

O Ashwattha! Bind my enemies with the unforeseen noose of death, the goddess of sin, whom I hate and who hate me. (5)