3.8.6Atharvaved
मंत्र:३.८.६ (3.8.6)सूक्त (८)

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मंत्र:३.८.६ (3.8.6)सूक्त (८)

अ॒हं गृ॑भ्णामि॒ मन॑सा॒ मनां॑सि॒ मम॑ चि॒त्तमनु॑ चि॒त्तेभि॒रेत॑ । मम॒ वशे॑षु॒ हृद॑यानि वः कृणोमि॒ मम॑ या॒तमनु॑वर्त्मान॒ एत॑ ॥ (६)

हे मेरे विरोधी जनो! मैं अपने मन के द्वारा तुम सब के मनों को और अपने चित्त के द्वारा तुम सब के चित्तों को अपने वश में करता हूं. आओ और तुम सब भी अपने हृदयों को मेरे वश में करो. तुम सब भी मेरी इच्छा के अनुसार मेरा अनुगमन करो और मेरे अनुकूल बनो. (६)

O my opponents! I control your minds through My mind and your minds through My mind. Come and all of you also control your hearts with Me. All of you also follow Me according to My will and be compatible with Me. (6)