4.2.7Atharvaved
मंत्र:४.२.७ (4.2.7)सूक्त (२)

Shlok 1 of 1

मंत्र:४.२.७ (4.2.7)सूक्त (२)

हि॑रण्यग॒र्भः सम॑वर्त॒ताग्रे॑ भू॒तस्य॑ जा॒तः पति॒रेक॑ आसीत् । स दा॑धार पृथि॒वीमु॒त द्यां कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम ॥ (७)

सृष्टि के आदि में हिरण्यगर्भ उत्पन्न हुए तथा उत्पन्न होते ही सभी प्राणियों के स्वामी हो गए. उन्होंने इस धरती और आकाश को धारण किया. हम हवि द्वारा उन प्रजापति की पूजा करते हैं. (७)

Hiranyagarbha was born in the beginning of creation and became the swami of all beings as soon as he was born. He took this earth and sky. We worship those Prajapatis by Havi. (7)