4.2.8Atharvaved
मंत्र:४.२.८ (4.2.8)सूक्त (२)
Shlok 1 of 1
आपो॑ व॒त्सं ज॒नय॑न्ती॒र्गर्भ॒मग्रे॒ समै॑रयन् । तस्यो॒त जाय॑मान॒स्योल्ब॑ आसीद्धिर॒ण्ययः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम ॥ (८)
ईश्वर के द्वारा सब से प्रथम निर्मित जलों ने हिरण्यगर्भ को जन्म देने के लिए ईश्वर के वीर्य को धारण किया. उस उत्पन्न होने वाले प्रजापति के उल्ब अर्थात् गर्भ को घेरने वाली झील स्वर्णमय थी. हम हव्य द्वारा उस प्रजापति की पूजा करते हैं. (८)
The first waters created by God wore the semen of God to give birth to Hiranyagarbha. The lake that surrounded the womb of Prajapati, that is, the birth of prajapati, was golden. We worship that Prajapati by Havya. (8)