4.7.5Atharvaved
मंत्र:४.७.५ (4.7.5)सूक्त (७)

Shlok 1 of 1

मंत्र:४.७.५ (4.7.5)सूक्त (७)

परि॒ ग्राम॑मि॒वाचि॑तं॒ वच॑सा स्थापयामसि । तिष्ठा॑ वृ॒क्ष इ॑व॒ स्थाम्न्यभ्रि॑खाते॒ न रू॑रुपः ॥ (५)

हे खोदने से प्राप्त होने वाली जड़ीबूटी! जनसमूह के समान प्रभावशाली तेरे विष को भी हम अपनी मंत्र शक्ति के द्वारा शरीर से निकाल कर दूर स्थापित करते हैं. तू अपने स्थान पर वृक्ष के समान निश्चल रह तथा इस पुरुष को मूर्च्छित मत कर. (५)

O herb obtained by digging! Like the masses, we also remove your poison from the body through our mantra power and establish it away. Be as firm as a tree in your place and do not make this man faint. (5)