4.8.6Atharvaved
मंत्र:४.८.६ (4.8.6)सूक्त (८)

Shlok 1 of 1

मंत्र:४.८.६ (4.8.6)सूक्त (८)

अ॒भि त्वा॒ वर्च॑सासिच॒न्नापो॑ दि॒व्याः पय॑स्वतीः । यथासो॑ मित्र॒वर्ध॑न॒स्तथा॑ त्वा सवि॒ता क॑रत् ॥ (६)

हे राजा! दिव्य जल अपने तेज से तुम्हें सींचे, जिस से तुम मित्रों के बढ़ाने वाले बनो. सब को प्रेरणा देने वाले सविता देव तुम्हें सामर्थ्य दें. (६)

O king! May the divine water water water you with its glory, so that you become the enhancer of friends. May Savita Dev, who inspires everyone, give you strength. (6)