5.1.9Atharvaved
मंत्र:५.१.९ (5.1.9)सूक्त (१)
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अ॒र्धम॒र्धेन॒ पय॑सा पृणक्ष्य॒र्धेन॑ शुष्म वर्धसे अमुर । अविं॑ वृधाम श॒ग्मियं॒ सखा॑यं॒ वरु॑णं पु॒त्रमदि॑त्या इषि॒रम् । क॑विश॒स्तान्य॑स्मै॒ वपूं॑ष्यवोचाम॒ रोद॑सी सत्य॒वाचा॑ ॥ (९)
मित्र और वरुण अदिति के पुत्र हैं. हम इन दोनों की वृद्धि करते हैं. हे वरुण! तुम आधे दूध, घृत आदि से इस सेना का बल बढ़ाते हो और आधे से अपनी वृद्धि करते हो. हे आकाश और पृथ्वी के देवो! विद्वान् ऋषियों ने जिन शरीरों का वर्णन किया है, हम अपनी सत्य वाणी से उन्हीं का वर्णन करते हैं. (९)
Friend and Varun are Aditi's sons. We increase both of these. O Varuna! You increase the strength of this army with half milk, ghee etc. and increase yourself by half. O gods of heaven and earth! We describe the bodies described by the learned sages with our true speech. (9)