5.18.13Atharvaved
Sanskrit
दे॑वपी॒युश्च॑रति॒ मर्त्ये॑षु गरगी॒र्णो भ॑व॒त्यस्थि॑भूयान् । यो ब्रा॑ह्म॒णं दे॒वब॑न्धुं हि॒नस्ति॒ न स पि॑तृ॒याण॒मप्ये॑ति लो॒कम् ॥ (१३)
Hindi
जो देवबंधु ब्राह्मण की हिंसा करता है, वह देवशस्त्र मनुष्यों के मध्य विष खाने वाले के समान चलता फिरता है और अस्थि मात्र रह जाता है. वह पितृयान द्वारा मिलने वाले लोक को प्राप्त नहीं करता. (१३)
English
The one who commits violence against the Devbandhu Brahmin, that devastra moves like a poison eater among human beings and remains a bone. He does not get the folk found by Pitriyana. (13)
Shlok 1 of 1