5.3.1Atharvaved
मंत्र:५.३.१ (5.3.1)सूक्त (३)

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मंत्र:५.३.१ (5.3.1)सूक्त (३)

ममा॑ग्ने॒ वर्चो॑ विह॒वेष्व॑स्तु व॒यं त्वेन्धा॑नास्त॒न्वं॑ पुषेम । मह्यं॑ नमन्तां प्र॒दिश॒श्चत॑स्र॒स्त्वयाध्य॑क्षेण॒ पृत॑ना जयेम ॥ (१)

हे अग्नि देव! युद्धों में हम वर्चस्वी बनें. हम तुम्हें प्रकट करते हुए अपने शरीर को शक्तिशाली बनाएं. चारों दिशाएं और प्रदिशाएं हमारे सामने तथा आप के संरक्षण में शत्रुओं की इस सेना पर विजय प्राप्त करें. (१)

O God of Agni! Let us dominate wars. Let us make our body powerful by revealing you. May the four directions and directions prevail in front of us and this army of enemies under your protection. (1)