5.3.10Atharvaved
मंत्र:५.३.१० (5.3.10)सूक्त (३)
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ये नः॑ स॒पत्ना॒ अप॒ ते भ॑वन्त्विन्द्रा॒ग्निभ्या॒मव॑ बाधामह एनान् । आ॑दि॒त्या रु॒द्रा उ॑परि॒स्पृशो॑ नो उ॒ग्रं चे॒त्तार॑मधिरा॒जम॑क्रत ॥ (१०)
जो हमारे शत्रु हैं, वे हम से दूर भाग जाएं. हम इंद्र और अग्नि के द्वारा अपने शत्रुओं को बांधते हैं. आदित्य और रुद्र ने हमें जो राजा बना दिया है, वह सावधान करने वाला है. (१०)
Those who are our enemies should run away from us. We bind our enemies through Indra and Agni. The king that Aditya and Rudra have made us is a cautionary one. (10)