5.3.6Atharvaved
मंत्र:५.३.६ (5.3.6)सूक्त (३)
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दैवीः॑ षडुर्वीरु॒रु नः॑ कृणोत॒ विश्वे॑ देवास इ॒ह मा॑दयध्वम् । मा नो॑ विददभि॒भा मो अश॑स्ति॒र्मा नो॑ विदद्वृजि॒ना द्वेष्या॒ या ॥ (६)
हे विश्वे देव! आप सब हमारे लिए पृथ्वी, आकाश, जल, ओषधि, दिन और रात-इन छह दिव्य शक्तियों को बढ़ाइए. आप प्रसन्न हों, जिस से कोई न हमारा तिरस्कार करे और न हमारी निंदा करे. हमें पाप न लगे. (६)
O God of the universe! All of you increase for us the six divine powers of earth, sky, water, medicine, day and night. May you be happy that no one will despise or condemn us. We should not sin. (6)