5.5.6Atharvaved
मंत्र:५.५.६ (5.5.6)सूक्त (५)
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हिर॑ण्यवर्णे॒ सुभ॑गे॒ सूर्य॑वर्णे॒ वपु॑ष्टमे । रु॒तं ग॑च्छासि निष्कृते॒ निष्कृ॑ति॒र्नाम॒ वा अ॑सि ॥ (६)
हे स्वर्ण के समान वर्ण वाली सुभगा एवं सूर्य के समान चमक वाली ओषधि लाख! तू शरीर को स्वस्थ बनाती है. तू घाव को ठीक करती है, इसलिए तेरा नाम निष्कृति है. (६)
O Subhaga with the color of gold and a medicine with a glow like the sun! You make the body healthy. You heal the wound, so your name is innocence. (6)