5.6.2Atharvaved
मंत्र:५.६.२ (5.6.2)सूक्त (६)

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मंत्र:५.६.२ (5.6.2)सूक्त (६)

अना॑प्ता॒ ये वः॑ प्रथ॒मा यानि॒ कर्मा॑णि चक्रि॒रे । वी॒रान्नो॒ अत्र॒ मा द॑भ॒न्तद्व॑ ए॒तत्पु॒रो द॑धे ॥ (२)

हे मनुष्यो! तुम्हारे विरोधी शत्रुओं ने जो उत्तम कर्म किए हैं, उन कर्मो से वे हमारी संतानों तथा वीरों का विनाश न करें, इसलिए मैं वह अभिचार कर्म तुम्हारे सामने प्रस्तुत कर रहा हूं. (२)

O men! May your enemies not destroy our children and heroes with the good deeds that they have done, so I am presenting that act to you. (2)