5.6.7Atharvaved
मंत्र:५.६.७ (5.6.7)सूक्त (६)

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मंत्र:५.६.७ (5.6.7)सूक्त (६)

अपै॑तेनारात्सीरसौ॒ स्वाहा॑ । ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒षेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः ॥ (७)

इस अभिचार कर्म द्वारा ही इस राजा ने अपने शत्रुओं का विरोध करते हुए उन का दमन किया तथा सिद्धि प्राप्त की. इस की यह हवि सुंदर आहुति वाली हो. हे सोम और रुद्र! तुम अत्यधिक तीक्ष्ण आयुधों वाले तथा सुख प्राप्त करने वाले हो. तुम हमें इस युद्ध में विजयी बना कर सुख प्रदान करो. (७)

It was through this act of abhichar that this king opposed his enemies and suppressed them and attained perfection. O Som and Rudra! You are very sharp and happy. May you make us victorious in this war and give us happiness. (7)