5.7.9Atharvaved
मंत्र:५.७.९ (5.7.9)सूक्त (७)

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मंत्र:५.७.९ (5.7.9)सूक्त (७)

या म॑ह॒ती म॒होन्मा॑ना॒ विश्वा॒ आशा॑ व्यान॒शे । तस्यै॑ हिरण्यके॒श्यै निरृ॑त्या अकरं॒ नमः॑ ॥ (९)

असमृद्धि अर्थात्‌ दरिद्रता हमारी सभी आशाओं को सीमित कर रही है. सुनहरे केशों वाली इस असमृद्धि को मैं नमस्कार करता हूं. (९)

Poverty is limiting all our hopes. I salute this unfriendly with golden hair. (9)