6.4.2Atharvaved
मंत्र:६.४.२ (6.4.2)सूक्त (४)
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अंशो॒ भगो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मादि॑तिः॒ पान्तु॑ म॒रुतः॑ । अप॒ तस्य॒ द्वेषो॑ गमेदभि॒ह्रुतो॑ यावय॒च्छत्रु॒मन्ति॑तम् ॥ (२)
अदिति और उन के भग, वरुण, मित्र और अर्यमा नामक पुत्र और उनचास मरुतों का समूह मेरी रक्षा करें. इन का द्वेष कर्म हम से दूर चला जाए. तुम हम से द्वेष रखने वाले शन्रु को हम से पृथक् करो. (२)
May Aditi and her God, Varuna, friend and son named Aryama and a group of forty-nine Maruts protect me. Let their malice go away from us. Separate the shanru who hates us from us. (2)