6.6.3Atharvaved
मंत्र:६.६.३ (6.6.3)सूक्त (६)

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मंत्र:६.६.३ (6.6.3)सूक्त (६)

यो नः॑ सोमाभि॒दास॑ति॒ सना॑भि॒र्यश्च॒ निष्ट्यः॑ । अप॒ तस्य॒ बलं॑ तिर म॒हीव॒ द्यौर्व॑ध॒त्मना॑ ॥ (३)

हे सोम! हमारा जो संबंधी हमारा अभिभव करना चाहता है तथा जो निकृष्ट शत्रु हमें बाधा पहुंचाता है, तुम उस को उसी प्रकार नष्ट कर दो, जिस प्रकार झ़्ुलोक वज्र के द्वारा विनाश करता है. (३)

O Mon! Destroy our relative who wants to experience us and the evil enemy who obstructs us, just as the world destroys through thunderbolts. (3)