8.1.5Atharvaved
मंत्र:८.१.५ (8.1.5)सूक्त (१)
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तुभ्यं॒ वातः॑ पवतां मात॒रिश्वा॒ तुभ्यं॑ वर्षन्त्व॒मृता॒न्यापः॑ । सूर्य॑स्ते त॒न्वे॒ शं त॑पाति॒ त्वां मृ॒त्युर्द॑यतां॒ मा प्र मे॑ष्ठाः ॥ (५)
हे मरण के समीप पहुंचे हुए पुरुष! वायु तेरे सुख के लिए चले. जल तेरे लिए अमृत की वर्षा करे. सूर्य देव तेरे शरीर को सुख देने के लिए तपें. हे पुरुष! मृत्यु देव तुझ पर दया करें. (५)
O men who have come near death! Let the wind go for your happiness. May the water rain nectar for you. May the Sun God heat up to give happiness to your body. O man! May death god have mercy on you. (5)