8.2.7Atharvaved
मंत्र:८.२.७ (8.2.7)सूक्त (२)

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मंत्र:८.२.७ (8.2.7)सूक्त (२)

अधि॑ ब्रूहि॒ मा र॑भथाः सृ॒जेमं तवै॒व सन्त्सर्व॑हाया इ॒हास्तु॑ । भवा॑शर्वौ मृ॒डतं॒ शर्म॑ यच्छतमप॒सिध्य॑ दुरि॒तं ध॑त्त॒मायुः॑ ॥ (७)

हे मृत्यु! तुम इस के पक्षपात का वचन कहो. अर्थात्‌ बोलो कि यह मेरा है. तुम इसे मारने का आरंभ मत करो. यह तुम्हारा ही जन है. यह भूलोक में सर्वत्र गति वाला बने. हे भव और शर्व! तुम इसे सुखी करो तथा इस के कल्याण का प्रयत्न करो. तुम इस के व्याधि रूपी पाप को निकाल कर इस में आयु को स्थापित करो. (७)

O death! You promise the partiality of this. That is, say that it is mine. Don't you start killing it. This is your own people. It should be moving everywhere in the earth. O Bhava and Sharva! Make it happy and try for its welfare. You remove the sin of its disease and establish age in it. (7)