8.2.9Atharvaved
मंत्र:८.२.९ (8.2.9)सूक्त (२)

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मंत्र:८.२.९ (8.2.9)सूक्त (२)

दे॒वानां॑ हे॒तिः परि॑ त्वा वृणक्तु पा॒रया॑मि त्वा॒ रज॑स॒ उत्त्वा॑ मृ॒त्योर॑पीपरम् । आ॒राद॒ग्निं क्र॒व्यादं॑ नि॒रूहं॑ जी॒वात॑वे ते परि॒धिं द॑धामि ॥ (९)

रुद्र आदि देवों का आयुध तुम्हारी हिंसा न करें. मैं मूर्च्छा लक्षण वाले आवरण से तुम्हें अलग करता हूं. मैं मृत्यु के पाश से तुम्हारा उद्धार करता हूं. मैं मांस खाने वाली अग्नि को तुझ से दूर निकालता हूं तथा तेरे जीवन के लिए परकोटे के रूप में यज्ञ की अग्नि को धारण करता हूं. (९)

Do not do your violence. I distinguish you from the cover with fainting symptoms. I save you from the loop of death. I take out the flesh-eating agni away from you and wear the agni of yajna as a parakote for your life. (9)