8.5.7Atharvaved
मंत्र:८.५.७ (8.5.7)सूक्त (५)
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ये स्रा॒क्त्यं म॒णिं जना॒ वर्मा॑णि कृ॒ण्वते॑ । सूर्य॑ इव॒ दिव॑मा॒रुह्य॒ वि कृ॒त्या बा॑धते व॒शी ॥ (७)
कृत्या राक्षसी से बचाने वाले लोग तिलक वृक्ष से निर्मित मणि को अपना कवच बना लेते हैं. यह मणि दूसरे द्वारा भेजी गई कृत्या का उसी प्रकार विनाश करती है, जिस प्रकार सूर्य आकाश में पहुंच कर अंधकार का विनाश करते हैं. (७)
People who protect from Krita Rakshasi make the gem made of tilak tree their armor. This gem destroys the work sent by another in the same way as the sun reaches the sky and destroys darkness. (7)