9.2.1Atharvaved
मंत्र:९.२.१ (9.2.1)सूक्त (२)

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मंत्र:९.२.१ (9.2.1)सूक्त (२)

सपत्न॒हन॑मृष॒भं घृ॒तेन॒ कामं॑ शिक्षामि ह॒विषाज्ये॑न । नी॒चैः स॒पत्ना॒न्मम॑ पादय॒ त्वम॒भिष्टु॑तो मह॒ता वी॒र्येण ॥ (१)

मैं शत्रु विनाशक वृषभ रूपी काम को हवि एवं आज्य से प्रसन्न करता हूं. हे वृषभ! तुम्हारी स्तुति करने वाले मुझ स्तोता के शत्रुओं को तुम अपने महान पराक्रम से नीचे गिराओ. (१)

I please the work of Taurus, the destroyer of the enemy, with havi and ajya. O Taurus! Bring down the enemies of my psalms who praise you with your great might. (1)