9.2.3Atharvaved
मंत्र:९.२.३ (9.2.3)सूक्त (२)
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दुः॒ष्वप्न्यं॑ काम दुरि॒तं च॑ कमाप्र॒जस्ता॑मस्व॒गता॒मव॑र्तिम् । उ॒ग्र ईशा॑नः॒ प्रति॑ मुञ्च॒ तस्मि॒न्यो अ॒स्मभ्य॑मंहूर॒णा चिकि॑त्सात् ॥ (३)
हे उग्र एवं स्वामी कामदेव! तुम अपने स्वप्न रूपी पाप को प्रजा अर्थात् संतान की हीनता को एवं निर्धनता को उसी और भेजो जो पराजय कर के हमें विपत्ति में डालने की चेष्टा करता है. (३)
O fierce and swami Kamadeva! You should send your dream sin to the inferiority of the people, that is, the children, and the poverty to the one who tries to defeat and put us in disaster. (3)