9.2.4Atharvaved
मंत्र:९.२.४ (9.2.4)सूक्त (२)

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मंत्र:९.२.४ (9.2.4)सूक्त (२)

नु॒दस्व॑ काम॒ प्र णु॑दस्व का॒माव॑र्तिं यन्तु॒ मम॒ ये स॒पत्नाः॑ । तेषां॑ नु॒त्ताना॑मध॒मा तमां॒स्यग्ने॒ वास्तू॑नि॒ निर्द॑ह॒ त्वम् ॥ (४)

हे कामदेव! दरिद्रता को उन की और जाने के लिए प्रेरित करो जो मेरे शत्रु हैं. वे ही मेरी दरिद्रता को प्राप्त करें. हे अग्नि! वे अंधकार में पड़े रहें. तुम उन के घर की वस्तुओं को भस्म कर दो. (४)

O Cupid! Inspire poverty to go towards those who are my enemies. They are the ones who attain my poverty. O agni! They should remain in darkness. You consume the objects of their house. (4)