9.2.6Atharvaved
मंत्र:९.२.६ (9.2.6)सूक्त (२)
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काम॒स्येन्द्र॑स्य॒ वरु॑णस्य॒ राज्ञो॒ विष्णो॒र्बले॑न सवि॒तुः स॒वेन॑ । अ॒ग्नेर्हो॒त्रेण॒ प्र णु॑दे स॒पत्ना॑ञ्छ॒म्बीव॒ नाव॑मुद॒केषु॒ धीरः॑ ॥ (६)
जिस प्रकार पतवार धारण करने वाला नाविक नौका चलाता है, उसी प्रकार मैं कामदेव के, इंद्र के, राजा वरुण के, विष्णु के और सविता के बल से तथा देवों के यज्ञ से शत्रुओं को दूर भगाता हूं. (६)
Just as the sailor who holds the helm drives the boat, in the same way I drive away the enemies by the strength of Kamadeva, Indra, King Varuna, Vishnu and Savita and with the sacrifice of the gods. (6)