9.3.7Atharvaved
मंत्र:९.३.७ (9.3.7)सूक्त (३)

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मंत्र:९.३.७ (9.3.7)सूक्त (३)

ह॑वि॒र्धान॑मग्नि॒शालं॒ पत्नी॑नां॒ सद॑नं॒ सदः॑ । सदो॑ दे॒वाना॑मसि देवि शाले ॥ (७)

हे शाला! तुम में हव्य प्राप्त अग्नि, कुंड, देवों के बैठने योग्य आसन तथा पत्नियों सहित यजमानों के बैठने योग्य स्थान है. (७)

O school! You have a agni, kund, seating seating posture of gods and a place for the hosts, including wives. (7)