9.5.1Atharvaved
मंत्र:९.५.१ (9.5.1)सूक्त (५)
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आ न॑यै॒तमा र॑भस्व सु॒कृतां॑ लो॒कमपि॑ गच्छतु प्रजा॒नन् । ती॒र्त्वा तमां॑सि बहु॒धा म॒हान्त्य॒जो नाक॒मा क्र॑मतां तृ॒तीय॑म् ॥ (१)
इस अज को लाओ और यज्ञ कर्म आरंभ करो. जानता हुआ यह पुण्यात्माओं के लोक को भी जाए. यह अनेक प्रकार के विशाल अंधकारों को पार कर के तीसरे स्वर्ग में पहुंचे. (१)
Bring this aj and start the yajna karma. Knowing that it should also go to the world of the saints. He overcame many types of vast darknesses and reached the third heaven. (1)