9.5.14Atharvaved
Sanskrit
अ॑मो॒तं वासो॑ दद्या॒द्धिर॑ण्य॒मपि॒ दक्षि॑णाम् । तथा॑ लो॒कान्त्समा॑प्नोति॒ ये दि॒व्या ये च॒ पार्थि॑वाः ॥ (१४)
Hindi
जो स्वर्ण की दक्षिणा को वस्त्र में लपेट कर देता है, वह पुरुष दिव्य एवं पार्थिव लोकों को प्राप्त करता है. (१४)
English
The man who wraps the dakshina of gold in a cloth receives the divine and earthly worlds. (14)
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