9.5.4Atharvaved
मंत्र:९.५.४ (9.5.4)सूक्त (५)
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अनु॑छ्य श्या॒मेन॒ त्वच॑मे॒तां वि॑शस्तर्यथाप॒र्वसिना॒ माभि मं॑स्थाः । माभि द्रु॑हः परु॒शः क॑ल्पयैनं तृ॒तीये॒ नाके॒ अधि॒ वि श्र॑यैनम् ॥ (४)
हे विशस्त! अर्थात् विशेष शासक काले लोहे के शस्त्र के द्वारा इस को शुद्ध करो. इस के जोड़ों को कष्ट न हो. इस के प्रत्येक जोड़ की कल्पना करते हुए इसे तीसरे स्वर्ग में पहुंचाओ. (४)
O vishvast! That is, purify it by special ruler black iron weapon. Do not hurt the joints of this. Imagine each addition of this and deliver it to the third heaven. (4)