9.7.8Atharvaved
मंत्र:९.७.८ (9.7.8)सूक्त (७)

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मंत्र:९.७.८ (9.7.8)सूक्त (७)

सर्वो॒ वा ए॒ष ज॒ग्धपा॑प्मा॒ यस्यान्न॑म॒श्नन्ति॑ ॥ (८)

अतिथि जिस का अन्न खाता है, उस के सभी पापों को भी खाता है. (८)

The guest also eats all the sins of the one whose food he eats. (8)