1.12.9Rigved
श्लोक:१.१२.९ (1.12.9)सूक्त (१२)

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श्लोक:१.१२.९ (1.12.9)सूक्त (१२)

यो अ॒ग्निं दे॒ववी॑तये ह॒विष्मा॑ँ आ॒विवा॑सति । तस्मै॑ पावक मृळय ॥ (९)

हे पावक! जो हव्य देने वाले तुम्हारी शरण में आकर इस इच्छा से तुम्हारी सेवा करते हैं कि उनका हव्य देवों को मिल सके, तुम उनकी रक्षा करो. (९)

This pavak! Those who give you prayers come to your refuge and serve you with the desire that their fate may be given to the gods, you protect them. (9)