Sanskrit
प्र तद्वो॑चेयं॒ भव्या॒येन्द॑वे॒ हव्यो॒ न य इ॒षवा॒न्मन्म॒ रेज॑ति रक्षो॒हा मन्म॒ रेज॑ति । स्व॒यं सो अ॒स्मदा नि॒दो व॒धैर॑जेत दुर्म॒तिम् । अव॑ स्रवेद॒घशं॑सोऽवत॒रमव॑ क्षु॒द्रमि॑व स्रवेत् ॥ (६)
Hindi
हम वर्धनशील इंद्र के लिए स्तुति करते हैं. जिस प्रकार आह्वान के योग्य एवं राक्षसहंता इंद्र हमारे बुलाने पर आते हैं, उसी प्रकार इंद्र अभिलाषापूर्वक हमारे यज्ञकर्म के प्रति आगमन करते हैं एवं हमारे बुद्धिहीन निंदकों को वध के उपायों द्वारा दूर कर देते हैं. जिस प्रकार जल नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार चोर का भी अधःपतन होता है. (६)
English
We praise the growing Indra. Just as Indra, the worthy of call and the demonic, comes upon our call, so Indra willingly comes to our yajnakarma and removes our mindless cynics by means of killing them. Just as water flows downwards, so too does the thief's degeneration. (6)
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