Sanskrit
आदित्ते॑ अ॒स्य वी॒र्य॑स्य चर्किर॒न्मदे॑षु वृषन्नु॒शिजो॒ यदावि॑थ सखीय॒तो यदावि॑थ । च॒कर्थ॑ का॒रमे॑भ्यः॒ पृत॑नासु॒ प्रव॑न्तवे । ते अ॒न्याम॑न्यां न॒द्यं॑ सनिष्णत श्रव॒स्यन्तः॑ सनिष्णत ॥ (५)
Hindi
हे इंद्र! तुम सोमपान से प्रसन्न होकर यजमानों की रक्षा करते हो एवं इच्छा पूर्ण करते हो. इसी हेतु तुम्हारी शक्ति बढ़ाने के लिए वे तुम्हें बार-बार सोमरस प्रदान करते हैं. तुम यजमानों के सुख के निमित्त युद्ध में सिंहनाद करते हो. यजमान भांति-भांति की भोग्य वस्तुएं एवं विजय के द्वारा अन्न प्राप्त करने की इच्छा से तुम्हारे समीप जाते हैं. (५)
English
O Indra! You are pleased with the sompan and protect the hosts and fulfill the desire. That is why they repeatedly give you somers to increase your power. You sing in battle for the pleasure of hosts. Hosts approach you with a desire to receive food through a variety of luxuries and victory. (5)
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