Sanskrit
त्वं तमि॑न्द्र वावृधा॒नो अ॑स्म॒युर॑मित्र॒यन्तं॑ तुविजात॒ मर्त्यं॒ वज्रे॑ण शूर॒ मर्त्य॑म् । ज॒हि यो नो॑ अघा॒यति॑ शृणु॒ष्व सु॒श्रव॑स्तमः । रि॒ष्टं न याम॒न्नप॑ भूतु दुर्म॒तिर्विश्वाप॑ भूतु दुर्म॒तिः ॥ (७)
Hindi
हे इंद्र! तुम शूर, अनेक गुण युक्त एवं हमारी स्तुति के कारण उन्नत हो. तुम हमें चाहते हो. जो लोग हमारे प्रति शत्रुता रखते एवं हमें दुःख देते हैं, अपने वज्र द्वारा तुम उनका विनाश करो. हे सुंदर कानों वाले! हमारी बात सुनो. जिस प्रकार मार्ग में थके हुए पथिक को चोर बाधा पहुंचाते हैं, उसी प्रकार के दुष्टबुद्धि हिंसक तुम्हारी कृपा से हमारे समीप न रहें. (७)
English
O Indra! You are brave, of many qualities and advanced because of Our praise. You want us. Those who are hostile to us and hurt us, destroy them by your thunderbolt. O those with beautiful ears! Listen to us. Just as thieves obstruct the weary path in the way, so let the wicked spirit of the wicked, violent, by your grace, be not near us. (7)
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